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2020 में होगा सभी 9 ग्रहों का राशि परिवर्तन, पूरे साल अस्त नहीं होगा मंगल

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2020 में होगा सभी 9 ग्रहों का राशि परिवर्तन, पूरे साल अस्त नहीं होगा मंगल इस साल शनि, राहु और बृहस्पति के राशि परिवर्तन का रहेगा विशेष प्रभाव Dainik Bhaskar Jan 02, 2020, 11:53 AM IST जीवन मंत्र डेस्क.  नया साल 2020 कई मायनों में बहुत खास रहेगा। पंचांग गणना के अनुसार इस साल सभी 9 ग्रह अपनी राशि बदलेंगे। यहां तक कि एक ही राशि में स्थिर चल रहे शनि भी जनवरी 2020 में अपनी राशि बदलेंगे। शनि के राशि बदलने से साढ़े साती का नया दौर शुरू होगा। वहीं बृहस्पति मार्गी अौर वक्री होते हुए राशियों से गुजरेंगे। इसलिए इन ग्रहों की राशि परिवर्तन से भारत में कुछ न कुछ बदलाव भी देखने को मिलेंगे। ज्योतिषाचार्य पं गणेश मिश्रा के अनुसार 2020 की शुरुअात पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुई है। यह गुरु  का नक्षत्र है। 2020 का सूर्योदय बृहस्पति के नक्षत्र में होने से ये साल व्यापारियों अौर नौकरीपेशा लोगों के लिए अत्यंत कल्याणकारी हो सकता है। नए साल में में धनु राशि में पंचग्रही योग बनने और मंगल के स्वगृही होने से विभिन्न राशियों पर असर पड़ेगा।  ग्रहों की चाल बदलने से जीवन...

वसंत पञ्चमी या श्रीपंचमी

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Jump to navigation Jump to search वसन्त पंचमी राजा रवि वर्मा  द्वारा बनाया गया  देवी   सरस्वती  का चित्र आधिकारिक नाम वसन्त पंचमी अन्य नाम श्रीपंचमी सरस्वती पूजा अनुयायी हिन्दू Liturgical Color पीला अनुष्ठान पूजा  व सामाजिक कार्यक्रम तिथि माघ   शुक्ल   पंचमी 2019 date 28 जनवरी 2020 date 30 जनवरी  [1] समान पर्व आम का पत्ता वसंत पञ्चमी  या  श्रीपंचमी  एक  हिन्दू  का त्योहार है। इस दिन  विद्या  की  देवी   सरस्वती  की  पूजा  की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर  बांग्लादेश ,  नेपाल  और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन  पीले  वस्त्र धारण करते हैं। प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें  वसंत  लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में  सरसों  का फूल मानो सोना चमकने लगता,  जौ  और  गेहूँ  की बालियाँ खिलने लगत...

सत्ताइस नक्षत्रों से जानें व्यक्तित्व के हर रंग-ढंग

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सत्ताइस नक्षत्रों से जानें व्यक्तित्व के हर रंग-ढंग नक्षत्रों का ज्योतिष शास्त्र ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न प्रकार के नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। ये सभी नक्षत्र जितने महत्वपूर्ण हैं उतने ही वैयक्तिक जीवन पर भी असर डालते हैं। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन ये सच है कि जिस नक्षत्र में इंसान जन्म लेता है वह नक्षत्र उसके स्वभाव और आगामी जीवन पर अपना असर जरूर छोड़ता है। आइए जानें भिन्न-भिन्न नक्षत्रों में जन्म लेने वाले लोगों की क्या-क्या खासियत होती है। अश्विन नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रमुख और सबसे प्रथम अश्विन नक्षत्र को माना गया है। जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेता है वह बहुत ऊर्जावान होने के सथ-साथ हमेशा सक्रिय रहना पसंद करता है। इनकी महत्वाकांक्षाएं इन्हें संतुष्ट नहीं होने देतीं। ये लोग रहस्यमयी प्रकृत्ति के इंसान होने के साथ-साथ थोड़े जल्दबाज भी होते हैं जो पहले काम कर लेते हैं और बाद में उस पर विचार करते हैं। ये लोग अच्छे जीवनसाथी और एक आदर्श मित्र साबित होते हैं। भरणी नक्षत्र इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसकी वजह से इस नक्षत्र मे...

शनि 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे कैसा रहेगा आप का साल

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साल 2020 में ग्रहों की स्थितियों में कई बड़े फेरबदल होने वाले हैं। साल 2020 के शुरूआती दिनों में ही शनि अपनी राशि बदलेंगे। शनि 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के राशि परिवर्तन से साल 2020 में किन राशियों से शनि की अशुभ छाया हट जाएगी और किन राशि पर इनका प्रकोप रहेगा आइए जानते हैं न्यायकारक शनि गोचर 2020 में धनु राशि से अपनी स्वराशि मकर में 24 जनवरी को होने जा रहा है। इसी वर्ष 11 मई 2020 से 29 सितम्बर 2020 तक शनि मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर करेगा। इसी वर्ष शनि 27 दिसम्बर 2020 को अस्त भी हो जाएंगे, जिससे शनि के प्रभाव कुछ कम हो जाते हैं। धनु और मकर राशि में पहले से ही शनि की साढ़े साती का प्रभाव चल रहा था। अब कुम्भ राशि पर भी शनि की साढ़े साती का पहला चरण शुरु हो जाएगा। शनि मकर और कुम्भ दो राशियों के स्वामी हैं। शनि की दो राशियों में से एक राशि मकर में शनि का गोचर होने जा रहा है और शनि की दूसरी राशि कुम्भ शनि की स्व राशि और मूल त्रिकोण राशि है। शनि एक अनुशासनात्मक और न्याय कारक ग्रह हैं। जिस प्रकार से एक शिक्षक हमारी ऊर्ज़ाओं को समझ क...

ऐसी ग्रहदशा कराती है एक से अधिक विवाह……

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ऐसी ग्रहदशा कराती है एक से अधिक विवाह…… दाम्पत्य जीवन  में पड़ने वाले शुभ व अशुभ प्रभाव जन्मकुंडली  का सप्तम स्थान दाम्पत्य जीवन से सम्बन्धित फल देता है। सप्तम स्थान पर पडने वाला शुभ व अशुभ प्रभाव का मिला जुला रूप एक से अधिक शादी के योग बनाता है। बहु  विवाह के योग  कैसे बनते है और ग्रहों की वह कौन सी स्थिति है जिसके द्वारा यह जाना जाये की दो शादी क्यों होती है आइये जाने- दूसरे विवाह का बन सकता है योग – सप्तम स्थान पर यदि दो पापी ग्रहों का प्रभाव हो तथा सप्तमेष की दृष्टी सप्तम स्थान पर पड रही हो तो व्यक्ति का एक विवाह टूटने के बाद दूसरे विवाह का योग बनता है। इस योग में जहां सप्तम स्थान पर अशुभ ग्रह विवाह से दूर रखते है वहीं सप्तमेश का सप्तम स्थान पर प्रभाव विवाह का सुख बना देता है। प्रथम विवाह में आ सकती है दिक्कत – सप्तमेष यदि दूसरे, छठें या बारहवें स्थान पर स्थित हो तथा सप्तम स्थान पर कोई पापी ग्रह बुरा प्रभाव बना रहा हो तो प्रथम विवाह में दिक्कत आती है। सप्तम स्थान पर अशुभ ग्रह का प्रभाव विवाह के सुखों से हीन करता है। जब ...

नक्षत्र , नक्षत्र चरण ,और उनके फल

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नक्षत्र , नक्षत्र चरण ,और उनके फल नक्षत्र चरण फल : प्रत्येक नक्षत्र मे चार चरण होते है और एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। यह नवमांश जैसा ही है यानि इससे राशि के नौ वे भाग का फलित मिलता है। प्रत्येक चरण मे तीन ग्रह का प्रभाव होता है 1- राशि स्वामी, 2- नक्षत्र स्वामी, 3- चरण स्वामी। अश्वनी नक्षत्र चरण फल: प्रथम चरण : इसमे मंगल, केतु और मंगल का प्रभाव है। मेष 00 अंश से 03 अंश 20 कला। इसका स्वामी मंगल है। यह शारारिक क्रिया, साहस, प्रेरणा, प्रारम्भ का द्योतक है। जातक मध्यम कद, बकरे जैसा मुंह, छोटी नाक और भुजा, कर्कश आवाज, संकुचित नेत्र, कृश, धायल अथवा नष्ट अंग वाला होता है। इसके गुणदोष – शारारिक सक्रियता, साहस, प्रोत्साहन, आवेगी बली. भावनावश परिणाम की बिना चिंता कार्य है। जातक नृप सामान, निर्भीक, साहसी, अफवाहो के प्रति आकर्षित, मितव्ययी, वासनायुक्त, भावुक होता है। द्वितीय चरण : इसमे मंगल, केतु और शुक्र का प्रभाव है। मेष 03 अंश 20 कला से 06 अंश 40 कला। इसका स्वामी शुक्र है। यह अवबोध, अविष्कार, साकार कल्पना का द्योतक है। जातक श्याम वर्णी, चौड़े कन्धे, लम्बी नाक, लम्बी भुजा, छोटा लल...